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Tuesday, 7 July 2026

विश्वास, न की हर जगह विष का वास ।

“दोस्त वो नहीं जो हर बात पर यकीन करे, दोस्त वो है जो दुनिया के शक के बीच भी तुम पर यकीन रखे। दोस्ती में गलती माफ़ की जा सकती है, लेकिन बार-बार तोड़ा गया विश्वास दिल में एक खामोश फासला छोड़ जाता है।”

दो दोस्त थे—अमन और रोहित।

बचपन से साथ थे। अमन को भरोसा था कि अगर पूरी दुनिया उसके खिलाफ खड़ी हो जाए, तो रोहित उसके साथ खड़ा मिलेगा।

एक दिन अमन के बारे में किसी ने रोहित से एक झूठ कह दिया।

रोहित ने अमन से पूछने के बजाय उस झूठ पर विश्वास कर लिया।

अमन ने सिर्फ इतना कहा—

“तूने दूसरों की बात पर यकीन करने से पहले मुझसे पूछना भी जरूरी नहीं समझा?”

रोहित के पास सफाई थी, मगर अमन के पास अब सवाल नहीं था।

कुछ दिनों बाद सच सामने आया। रोहित दौड़कर अमन के पास पहुँचा और बोला—

“मुझे माफ कर दे… मैं गलत था।”

अमन मुस्कुराया और बोला—

“गलती तेरी मुझ पर शक करने की नहीं थी… गलती ये थी कि तूने मेरा भरोसा बचाने की कोशिश ही नहीं की।”

उस दिन दोनों फिर साथ तो थे…

लेकिन उनकी दोस्ती में पहले जैसा विश्वास कभी वापस नहीं आया।

क्योंकि दोस्ती टूटने की आवाज़ नहीं होती,

बस एक दिन भरोसा चुपचाप मर जाता है।

विश्वास, न की हर जगह विष का वास ।

“दोस्त वो नहीं जो हर बात पर यकीन करे, दोस्त वो है जो दुनिया के शक के बीच भी तुम पर यकीन रखे। दोस्ती में गलती माफ़ की जा सकती है, लेकिन बार-ब...