जैसे राम जी ने रावण का संहार किया,
वैसे ही आपके जीवन से सभी चिंताओं, दुखों और नकारात्मकता का नाश हो।
विजयादशमी की अनंत शुभकामनाएं! टू माई वॉरियर सेनापति 🚩⚔️
🙌 🙌 for you matarani ki trf se :)
🤝 relax don't need to feel bad kabhi kabhi pariksha leti hai Matarani bhi. Lekin humne bhi unhe 🤝 aise hi pakad rakha hai vo hame nahi bhulengi :)
Blessed and tooo much happy today is navratri ki shopping karne gayee thi tab pta nahi kaha se mere shopping bag me 2 heart shape pendent nikle which can open to add pic. maine to aisa koi product during shopping dekha bhi nahi Matarani ne diya hai ye 🥰 one I alredy wore and other is for you kal se batana chah rahi hu aapko but you might be busy soo much well ! This is the blessing of Matarani for us :D
Want to show you ....
“दोस्त वो नहीं जो हर बात पर यकीन करे, दोस्त वो है जो दुनिया के शक के बीच भी तुम पर यकीन रखे। दोस्ती में गलती माफ़ की जा सकती है, लेकिन बार-बार तोड़ा गया विश्वास दिल में एक खामोश फासला छोड़ जाता है।”
दो दोस्त थे—अमन और रोहित।
बचपन से साथ थे। अमन को भरोसा था कि अगर पूरी दुनिया उसके खिलाफ खड़ी हो जाए, तो रोहित उसके साथ खड़ा मिलेगा।
एक दिन अमन के बारे में किसी ने रोहित से एक झूठ कह दिया।
रोहित ने अमन से पूछने के बजाय उस झूठ पर विश्वास कर लिया।
अमन ने सिर्फ इतना कहा—
“तूने दूसरों की बात पर यकीन करने से पहले मुझसे पूछना भी जरूरी नहीं समझा?”
रोहित के पास सफाई थी, मगर अमन के पास अब सवाल नहीं था।
कुछ दिनों बाद सच सामने आया। रोहित दौड़कर अमन के पास पहुँचा और बोला—
“मुझे माफ कर दे… मैं गलत था।”
अमन मुस्कुराया और बोला—
“गलती तेरी मुझ पर शक करने की नहीं थी… गलती ये थी कि तूने मेरा भरोसा बचाने की कोशिश ही नहीं की।”
उस दिन दोनों फिर साथ तो थे…
लेकिन उनकी दोस्ती में पहले जैसा विश्वास कभी वापस नहीं आया।
क्योंकि दोस्ती टूटने की आवाज़ नहीं होती,
बस एक दिन भरोसा चुपचाप मर जाता है।
शिव जी और पार्वती जी की प्रेम कहानी अनेक कष्टों के पश्चात ही सही पर पूर्णता प्राप्त प्रेम का प्रमाण है। चाहे इस प्रेम को सम्पूर्ण होने में युग-युगांतर लगे हो। इस प्रीत में पार्वती जी का कठोर तप तो शिव जी की सदियों की प्रतीक्षा समाहित है। इन दोनों जितने अद्भुत जीवनसाथी आज तक कोई नहीं हुए।
तीनों लोको के स्वामी होकर भी शिव जी के पास ना स्वयं की धरा, ना ही स्वयं का आकाश रहा। बस प्रकृति की गोद में बसा कैलाश पर्वत ही उनका निवास स्थान हुआ। और दूसरी ओर पार्वती जी हर जन्म में राजकुमारी या बडे़ घर की कन्या हुई। फिर भी उन्होंने अपने जीवन में शिव जी से अधिक किसी की भी चाह, कभी नहीं की। शिव जी सकल सृष्टि के स्वामी परन्तु अज्ञानियों की दृष्टि में एक अघोरी से ज्यादा कुछ नहीं पर उस दिव्य स्वरूपा देवी ने शिव जी को जो पूर्णता दी उससे वे देवों के देव महादेव बन गए।
पुराणों में वर्णित है कि पार्वती जी ने शिव जी की अर्धांगिनी बनने के लिए एक सौ आठ बार जन्म लिया। अंतिम, एक सौ आठवीं बार में वे पार्वती जी बनी। पार्वती जी के स्वरूप से पहले उनका जन्म दक्ष प्रजापति की कन्या के रूप में हुआ। तब उस जन्म में भी उन्होंने प्रेम से वशीभूत होकर शिव संग प्रेमविवाह किया। परन्तु उनके पिता प्रजापति की इच्छा रही थी कि सती, विष्णु जी को वरण करें। ताकि वे सब प्रकार के वैभवों से युक्त व प्रसन्न रहे। पर सती तैयार ना हुई बल्कि उन्होंने घोषणा कर दी कि मेरा वास्तविक सुख तो महादेव में निहित है। सती रूप में शिव जी की भक्ति की और दृढ़ता से उन्हें पति के रूप में पाया। इसी बात से दक्ष प्रजापति शिव जी के विरोधी बन गए और अपना सबसे बड़ा शत्रु अपने ही जमाता अर्थात् शिवजी को मान लिया।
शिव जी को तुच्छ दर्शाने के लिए दक्ष ने एक महायज्ञ का आयोजन किया जिसमें सभी देवी, देवता, यक्ष, किन्नर, साधु, संत, ऋषि-मुनियों को बुलाया गया। बस स्वयं की पुत्री और जमाता को छोड़कर। इस यज्ञ में जाने हेतु पार्वती जी ने शिव जी को समझाया कि आमंत्रित तो परायों को किया जाता है, अपनों को नहीं और वे वहाँ बिन बुलाए पहुँची तो उन्हें बहुत अपमानित होना पड़ा। उन्हें शिव जी की बात ना मानकर गलती हो जाने का भान हुआ और जब उन्होंने शिव जी के प्रति अपमानजनक शब्द सुने तो वे यज्ञ के अग्निकुण्ड में कूद गई। शिवजी को जब पता चला तो उनके गणों ने यज्ञ भंग कर दिया। सती ने पुनर्जन्म में पुनः शिव जी से मिलने का वचन देकर प्राण त्याग दिए।
शिवजी माता सती का मृत शरीर लिए विक्षिप्त से घुमते रहे। तब विष्णु जी ने सुदर्शन चक्र से इक्यावन भागों में सती का तन काट दिया। जो आज भी 51 शक्तिपीठ के रूप में स्थापित है।
वर्षोंवर्ष शिवजी का वियोग कम नहीं हुआ बल्कि बढ़ता ही गया। वे संसार से विरक्त हो गए। इधर सती ने वादा निभाते हुए पर्वतराज हिमवान और रानी मेना के घर पुत्री के रूप में पुनर्जन्म लिया। पर्वतराज की पुत्री होने के कारण उन्हें पार्वती नाम मिला। नारद जी ने किशोरी पार्वती जी को जीवनसाथी के रूप में शिव जी को पाने के लिए तपस्या का मार्ग बता दिया। तब पार्वती जी ने अपनी सखी को हृदय की बात बताई तो उनकी सखी उन्हें घोर बियाबान जंगल में लेकर गई। जहाँ पार्वती जी ने अन्न-जल का परित्याग करके विभिन्न कठोर से कठोर तप सहस्त्रों वर्षो तक किए।
तब शिवजी ने सप्तऋषियों को पार्वती जी को समझाने के लिए भी भेजा। स्वयं भी वटूवेश में समझाने पहुँचे थे। परन्तु शिव जी ने भी पार्वती जी दृढ़ संकल्प के आगे हार स्वीकार कर ली और वे पार्वती जी संग परिणय सूत्र में बंधने का वचन दे बैठे।
इस वचन को शिवजी ने फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी अर्थात् शिवरात्रि पर पूर्ण किया। शिव और शिवा का महामिलन शिवरात्रि को हुआ इसलिए यह दिन महाशिवरात्रि बन गया। कितनी कठिनाइयों को सहन करते हुए महलों की राजकुमारी पार्वती जी, पर्वतवासिनी बन गई।
पार्वती जी ने एक बार अपने लिए घर की इच्छा भी की तब शिव जी ने उन्हें लंका बनाकर भी दी थी। तब वास्तुविप्र रावण जो दक्षिणा में शिव जी को पाने की इच्छा से पूजन करने आया था, पार्वती जी ने सोने की लंका उसे ही भेंट कर दी परन्तु शिव जी को रावण के साथ जाने नहीं दिया। पार्वती जी ने किसी भी जन्म में भोले भंडारी के प्रेम के अतिरिक्त कोई धन, वैभव नहीं चाहा बल्कि जीवन की हर परिस्थिति में शिव जी का साथ सूर्य की किरणों, पुष्प में सुगंध तो शरीर संग प्राण बनकर निभाया।
वहीं शिव जी ने भी तो हर जन्म में पार्वती जी की प्रतीक्षा की। शिव जी, जो गले में मुण्डमाला पहनते है, वो पार्वती के हर एक जन्म का ही तो प्रतीक है। जिसे वे हृदय से लगाए रखते है। वास्तव में पार्वती जी अनेकों कठिनाईयाँ सहीं तो शिवजी ने भी अथाह वियोग सहा। जिसे सभी कुछ सरलता से प्राप्त हो जाए उनका जीवन कभी पूजनीय नहीं बनता। अंततः दोनों ने सम्पूर्ण प्रेम की परिभाषा गढ़ दी।
आज के युग में जहाँ प्रेम, प्रीत के मायने बदल गए है। जहाँ प्यार का स्थान अर्थ, भोग, विलास ने ले लिया है वहाँ शिव-शिवा का निश्चछल, निस्वार्थ, अडिग प्रेम सभी के लिए प्रेरणादायी है। तभी तो आज भी भक्तगण सदियों-सदियों बाद भी इस सम्पूर्ण हुए प्रेम के दिवस को महाशिवरात्रि के रूप में विशेष उल्लास, उमंग, ऊर्जा से मंदिर-मंदिर, घर, पंडालों में पूजन-व्रत करते हुए रात्रिजागरण के साथ मनाते है। साथ ही महादेव और महादेवी से इसी तरह के पूर्ण प्रेम को पाने की कामना करते हुए, जीवन में सम्पूर्णता और सकल सुख पाने की भी इच्छा करते हैं। इस सम्पूर्ण युगल, जगत के माता-पिता का आशीर्वाद सभी के जीवन पर सदा बना रहे। सभी को महाशिवरात्रि पर्व की अनंत स्वस्तिकामनाएं ।।
🌷🌹🙏🏻🙏🏻🌹🌷
Distance means so little when someone means so much. Happy Rose Day 💞🌹🌷 sorry for breakout became upset with each and everyone soooo soorry.....
Kabhi kabhi
gussa muskurahat se zyada Khas hota hai..... ❤️
Kyuki muskurahat toh Sab ke liye hoti hai......💜
magar gussa Sirf un ke liye hota hai......💖
jinhien Hum kabhi khona nhi chahte.......💝
I'm deeply sorry for my actions, and I regret hurting you more than anything. Please forgive me, and let's work through this together. I promise to be better and to love you even more .
Mangi thi dua maine rab se🙏
dena kuch aisa jo alag ho sabse 💝
Mila diya rab ne aapko humse 💞
aur kaha sambhalo yahi hai anmol sabse. 🎁🌹💖
Kahte hai kya lekar aaye the kya lekar jaoge mai last birth se lekar aayee hu aor marne ke baad bhi lekar jaungi ek chahat ... Aapse fir aapse hi milne ki
The best and most beautiful things in the world cannot be seen or even touched they must be felt with the heart.
Never had any intention to hurt you soooo sorry 🌹🧧🎈🍬🧁🍎🍰🍟💌🙏
👀 Only focus for sorry & the cute innocent puppy you love animals so I use the loyal one ....👀
I may not be perfect but I will love you with all of my heart. 🙏🙏
Just kidding don't😃😜 take this 🤭 it's just memes 😊
हरियाली तीज, ऐसी मान्यता हैं कि इस दिन माता गौरा को विरहाग्नि में तपकर भगवान शिव को पति रूप मे प्राप्त करने का वरदान स्वयं शिव जी से मिला था। वैसे इसदिन स्त्रियों को वर,उपहार देने का विशेष महत्व है ।
यह त्यौहार श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को उत्तरी भारत के सब नगरों में विशेष रूप से मनाया जाता है। घर-घर में झूले पड़ते हैं। नारियों के समूह गा-गाकर झूला तुलती है। सावन में सुन्दर से सुन्दर पकवान, गुंजिया, घेवर, कनी आदि बेटियों को सिंधारा भेजा जाता है। इस तीज पर मेंहदी लगाने का शेष महत्त्व है। स्त्रियाँ हाथों पर मेंहदी से भिन्न-भिन्न प्रकार बेल-बूटे बनाती हैं। तीजों पर मेंहदी रचाने की कलात्मक धियाँ परम्परा से स्त्री समाज में चली आ रही हैं। स्त्रियाँ पैरों में आलता भी लगाती हैं जो सुहाग का चिह्न माना जाना है
इस तीज पर निम्न बातों को त्यागने का विधान है - 1. ने छल कपट, 2. झूठ बोलना एवं दुर्व्यवहार, 3. परनिन्दा
कथा :-
भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की एक सुंदर पर्व हैं हरियाली तीज। इस पर्व से जुड़ी कथा में आप जानेंगे कि किस प्रकार माता पार्वती ने भगवान भोलेनाथ को अपने पति परमेश्वर के रूप में प्राप्त किया। हरियाली तीज व्रत कथा के अनुसार, इस कथा का वाचन स्वयं भगवान शिव ने माता पार्वती के समक्ष किया था।
माता पार्वती ने हिमालय पर्वत के घर में जन्म लिया था, और बचपन से ही उन्होंने भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करने का दृढ़ संकल्प ले लिया था। उन्होंने कई वर्षों तक हिमालय पर्वत पर विषम परिस्थितियों का सामना करते हुए कठोर तपस्या की। यह देखकर देवी पार्वती के पिता पर्वत राज अत्यंत चिंतित हो गए थे।
पार्वती ने तो मन ही मन में भगवान भोलेनाथ को अपने जीवनसाथी के रूप में स्वीकार कर लिया था।
इसके बाद अपनी सखियो के साथ पार्वती ने भगवान शिव की पूजा के लिए रेत के शिवलिंग का निर्माण किया और वह घोर तपस्या में लीन हो गईं। संयोग से माता पार्वती ने शिवलिंग की स्थापना भाद्रपद की शुक्ल तृतीया को हस्त नक्षत्र में की थी और साथ ही उन्होंने निर्जला व्रत भी रखा था। आखिरकार बहुत कठिन परीक्षा के पश्चात भगवान शिव माता पार्वती की सच्ची निष्ठा और तप से प्रसन्न हुए और उनकी मनोकामना पूर्ण होने का वरदान दे दिया। इसके बाद माता पार्वती ने व्रत का पारण किया।
इस प्रकार उन्होंने भगवान भोलेनाथ को अपने वर के रूप में प्राप्त करने का संकल्प पूर्ण कर लिया है। तत्पश्चात उनके पिता भी अपनी पुत्री का विवाह भगवान शिव से करवाने के लिए तैयार हो गए। अंततः भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह विधि पूर्वक संपन्न हुआ। इस प्रकार भगवान शिव और पार्वती का पुनर्मिलन संभव हो पाया।
नींद दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज है जो इंसान को कुछ पल के लिए हर गम से आजाद कर देती है । परेशान मन को शांत कर देती है और यही नींद पूरी न होना एक परेशानी तो है ही, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आपके दिल के लिए हानिकारक हो सकता है। आमतौर पर लोग खानपान और व्यायाम पर ध्यान देते हैं, लेकिन नींद को अक्सर अनदेखा करते हैं। हालांकि, नई रिसर्च से पता चला है कि नींद की थोड़ी कमी से भी शरीर में ऐसे बदलाव हो सकते हैं, जिनसे दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। हां जी आपका दिल जहां आपके डियर वन रहते है । 🤭 आइए एक नई रिसर्च पर नजर डालें, जिससे पता चलता है कि सिर्फ तीन रात तक खराब नींद लेने से आपके शरीर पर कैसा असर पड़ सकता है।
नींद की कमी का दिल की सेहत पर असर -:
हाल ही में शोधकर्ताओं ने एक रिसर्च की, जिसमें यह देखा गया कि थोड़े समय के लिए कम नींद लेने से आपके दिल पर कैसा असर होता है। इस प्रयोग में, 16 स्वस्थ युवा पुरुषों ने तीन रातों में दो अलग-अलग तरीकों से नींद ली: एक ग्रुप ने पूरी नींद (लगभग 8.5 घंटे) ली, और दूसरे ग्रुप ने सामान्य से लगभग आधी नींद (लगभग 4.25 घंटे) ली। इसके बाद दोनों ग्रुप के लोगों के ब्लड सैम्पल लिए गए। रिपोर्ट से पता चला कि कम नींद लेने से खून में उन प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है, जो दिल की बीमारियों से जुड़े होते हैं।
तीन रातों तक कम नींद लेने के बाद, 16 ऐसे प्रोटीनों में बढ़ोत्तरी देखी गई, जिनसे दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इन प्रोटीनों में स्ट्रेस से संबंधित इंटरल्यूकिन और केमोकाइन शामिल थे, जो शरीर में सूजन का संकेत देते हैं। रिसर्च में एक और बात सामने आई, कि भले ही व्यायाम से कुछ फायदेमंद प्रोटीन जैसे IL-6 (इंटरल्यूकिन-6) और BDNF (Brain-derived neurotrophic factor) बढ़ते हैं, लेकिन ये नींद की कमी से होने वाले नुकसान को पूरी तरह से खत्म नहीं कर पाते।
सिर्फ दिल ही नहीं, दिमाग पर भी होता है असर 🤯 -:
नींद की कमी सिर्फ़ दिल पर ही नहीं बल्कि दिमाग पर भी असर डालती है। कई दूसरी स्टडीज में यह देखा गया है कि, एक रात की खराब नींद भी खून में टाउ प्रोटीन (Tau proteins) की मात्रा बढ़ा सकती है, जो अल्जाइमर जैसी बीमारियों के संकेत होते हैं।
आप क्या कर सकते हैं? -
यहाँ बताई गई इन सभी बातों का ध्यान रखकर, आप लगातार नींद की कमी और उससे होने वाले नुकसान से बच सकते हैं। यहाँ नींद को बेहतर बनाने के लिए कुछ टिप्स दिए गए हैं, जो आपकी मदद कर सकते हैं:
– नींद का समय निर्धारित करें: रोजाना एक ही समय पर सोने और उठने की आदत डालें।
– शांत और आरामदायक जगह पर सोएं: जिस कमरे में आप सोते हैं, उसे, शांत, अंधेरा और ठंडा रखें।
– स्क्रीन टाइम कम करें: सोने से कम से कम 1 घंटा पहले मोबाइल और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का उपयोग न करें।
– उत्तेजक पदार्थों से बचें: शाम के समय चाय और कॉफी जैसी कैफीनयुक्त ड्रिंक्स या शराब आदि के सेवन से बचें।
– आरामदायक तकनीकों का सहारा लें: सोने से पहले मेडिटेशन, योगासन, प्राणायाम या हल्की स्ट्रेचिंग का अभ्यास करें। इससे न केवल नींद की क्वालिटी बेहतर होगी बल्कि आप सुबह ज्यादा एनर्जी महसूस करेंगे।
निष्कर्ष -:
यह स्टडी एक महत्वपूर्ण मैसेज देती है- सिर्फ कुछ रातों की अधूरी नींद भी दिल और दिमाग पर गहरा असर डाल सकती है। एक अच्छी नींद लेने का मतलब सिर्फ आराम करना नहीं है, बल्कि यह हमारे हेल्दी रूटीन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न -:
प्रश्न: क्या व्यायाम करने से नींद की कमी से होने वाले नुकसान खत्म हो जाएंगे?
उत्तर: व्यायाम करना सेहत के लिए बहुत अच्छा है, लेकिन यह नींद की कमी से दिल पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को पूरी तरह से खत्म नहीं कर सकता।
प्रश्न: नींद की कमी का दिल पर कितनी जल्दी असर पड़ सकता है?
उत्तर: सिर्फ तीन रातों तक अधूरी नींद लेने से, शरीर में सूजन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
प्रश्न: क्या कभी-कभी नींद न लेना खतरनाक है?
उत्तर: थोड़ी सी नींद की कमी भी दिल और दिमाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। इसलिए हर रात पर्याप्त नींद लेना जरूरी है।
प्रश्न: क्या कुछ लोगों का शरीर नींद की कमी को लेकर ज्यादा संवेदनशील होता है?
उत्तर: हां, शिफ्ट में (दिन और रात की शिफ्ट बदल-बदलकर) काम करने वाले लोग, बुजुर्ग और जिनको पहले से दिल की बीमारी है, उनका शरीर नींद की कमी से ज्यादा प्रभावित हो सकता है।
प्रश्न: कितने घंटे तक न सोना ‘नींद की कमी’ माना जाता है?
उत्तर: जैसा मै कहती आई हूं कि लगातार 24 घंटे या उससे ज्यादा समय तक जागते रहना ‘नींद की कमी’ माना जाता है। जितनी देर आप जागते हैं, आपके शरीर और दिमाग पर असर उतना ही ज्यादा होता है। और ये अच्छी बात नही है । सर दर्द पहले से ही एक समस्या है 😕
प्रश्न: क्या एक रात में 5 घंटे की नींद पर्याप्त है?
उत्तर: नहीं, स्वस्थ रहने के लिए हर रात 7 से 9 घंटे की नींद लेने की सलाह दी जाती है। रात में 7 घंटे से कम नींद लेने से, आपकी सेहत और काम करने की क्षमता, दोनों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
प्रश्न: क्या वीकेंड पर ज्यादा नींद लेकर पूरे सप्ताह की नींद की कमी को पूरा किया जा सकता है?
उत्तर: वीकेंड पर ज्यादा सोने से थोड़ी मदद मिल सकती है, लेकिन इससे सप्ताह भर की नींद की कमी से होने वाले नुकसान को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता। दिल और दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए बेहतर है कि, हर रात पर्याप्त नींद ली जाए।
पैसा सिर्फ आलसी महिलाओं को आकर्षित करता है जब एक महिला कठिन परिश्रम करती है तो पुरूष का पैसा उसके लिए सिर्फ वोनस है न कि सफलता की सीढी़ । आजकल के समाज मे आपने गोल्ड डिगर महिलाओं की बहुलता देखी होगी पर क्या आपने देखी है कभी कोल डिगर ???
एक कहानी के जरिये मिलाते है आपको कोल डिगर्स से और सोचिए आपके आसपास भी ये जरूर होगी बस नजरिया बदलिए-
एक छोटे से गाँव में रामलाल का परिवार रहता था। घर बहुत गरीब था। टूटी झोपड़ी, कच्ची दीवारें और छप्पर से टपकता पानी ही उनकी ज़िंदगी की पहचान थी। घर के चूल्हे में रोज़ धुआँ उठे, ये भी किस्मत की बात थी।रामलाल के तीन बेटे थे। बड़ा बेटा पढ़ाई में कमजोर रहा और खेत-खलिहान में ही लग गया। दूसरा बेटा शहर जाकर मज़दूरी करता था। सबसे छोटे बेटे सूरज का विवाह रामलाल ने पड़ोस के गाँव की एक सीधी-सादी लड़की गौरी से कर दिया।
गौरी बचपन से ही सम्पन्न घर में पली-बढ़ी थी। उसके मायके में कभी कमी नहीं रही। लेकिन विवाह के बाद जब वह रामलाल के घर की बहू बनकर ससुराल आई, तो यहाँ का हाल देखकर उसके मन में क्षण भर को निराशा छा गई।
घर में चारपाई तक ठीक से नहीं थी, रसोई में बर्तन आधे टूटे हुए थे और आटा-चावल हमेशा नाप-नाप कर इस्तेमाल करना पड़ता था। लेकिन गौरी ने मन में ठान लिया अब यही मेरा घर है और यही मेरा परिवार। इसे सँवारना मेरी ज़िम्मेदारी है।
गौरी सुबह सबसे पहले उठती, घर का आँगन बुहारती, पास के कुएँ से पानी भर लाती और पूरे परिवार के लिए भोजन बनाती। उसकी सबसे बड़ी खासियत थी वह कभी भी हालात की शिकायत नहीं करती थी। मायके की सम्पन्नता याद जरूर आती, पर चेहरे पर मुस्कान बनाए रखती।
धीरे-धीरे उसने घर की स्थिति बदलनी शुरू की। खेत में सब्ज़ियाँ उगाईं, मुर्गियाँ पाल लीं और गाँव की औरतों को सिलाई-कढ़ाई सिखाने लगी। उसकी मेहनत और समझदारी से घर में थोड़ी-थोड़ी आमदनी बढ़ने लगी।
ससुराल वाले पहले तो सोचते थे कि यह लड़की मायके की रानी थी, यहाँ कैसे टिकेगी? लेकिन गौरी ने सबको गलत साबित कर दिया। उसकी लगन और मेहनत ने घर की कंगाली को कम करना शुरू कर दिया।
गाँव की औरतें अक्सर उससे कहतीं गौरी, तू तो अमीर घर की बेटी है, यहाँ तुझे कितनी तकलीफ़ होती होगी।
गौरी मुस्कराकर कहती सुख-दुख घर की हालत से नहीं, दिल की सोच से तय होते हैं। अगर हम मेहनत करें तो गरीबी भी हमें थका नहीं सकती।
कुछ सालों में गौरी की मेहनत और समझदारी से रामलाल का परिवार धीरे-धीरे संभलने लगा। बच्चे पढ़ने लगे, घर की हालत सुधर गई।
गाँव के लोग अब उसे प्यार से लक्ष्मी बहू कहने लगे।
यह कहानी हमें सिखाती है - गरीबी कोई अभिशाप नहीं, यदि मन में हिम्मत और कर्मठता हो। एक औरत का धैर्य, त्याग और मेहनत परिवार को संवार देता है।
जैसे मेरी आदत है मै आस पास सभी के घर व्यापार लोगो के जीवन को अपने दृष्टिकोण से देखती हू्ं उनकी खूबियां और खामियां भी को अपने नजरिये से ही देखती हू्ं । तो अभी भी समाज ऐसी महिलाएं है जो परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा के साथ उसे आर्थिक रूप मे मजबूत बनाए रखने मे हमेशा प्रयत्नशील रहती है मेरा सपोर्ट हमेशा ऐसी महिलाओ को रहता है ऐसी कोल डिगर्स को दिल से नमन 🙏
प्रायः सभी पुराण तथा विद्वान् ऐसा कहते हैं कि ब्रह्मामें सृष्टि करनेकी शक्ति, विष्णुमें पालन करनेकी शक्ति, शिवमें संहार करनेकी शक्ति, सूर्यमें प्रकाश करनेकी शक्ति तथा शेष और कच्छपमें पृथ्वीको धारण करनेकी शक्ति स्वभावतः विद्यमान रहती है
इस प्रकार एकमात्र वे आद्याशक्ति ही स्वरूपभेद से सभी मे व्या प्त रहती हैं। वे ही अग्निमें दाहकत्व शक्ति तथा वायुमें संचारशक्ति हैं
कुण्डलिनी शक्तिके बिना शिव भी 'शव' बन जाते हैं। विद्वान् लोग शक्तिहीन जीवको निर्जीव एवं असमर्थ कहते हैं
अतएव हे मुनिजनो ! ब्रह्मासे लेकर तृणपर्यन्त सभी पदार्थ इस संसारमें शक्तिके बिना सर्वथा हेय हैं; क्योंकि स्थावर-जंगम सभी जीवोंमें वह शक्ति ही काम करती है। यहाँतक कि शक्तिहीन पुरुष शत्रुपर विजयी होने, चलने-फिरने तथा भोजन करनेमें भी सर्वथा असमर्थ रहता है।
वह सर्वत्र व्याप्त रहनेवाली आदिशक्ति ही 'ब्रह्म' कहलाती है। बुद्धिमान् मनुष्यको चाहिये कि वह अनेक प्रकारके यत्नोंद्वारा सम्यक् रूपसे उसकी उपासना करे तथा उसका चिन्तन करे
भगवान् विष्णुमें सात्त्विकी शक्ति रहती है, जिसके बिना वे अकर्मण्य हो जाते हैं। ब्रह्मामें राजसी शक्ति है, वे भी शक्तिहीन होकर सृष्टिकार्य नहीं कर सकते और शिवमें तामसी शक्ति रहती है, जिसके बलपर वे संहार-कृत्य सम्पादित करते हैं। इस विषयपर मनसे बार-बार विचार करके तर्क-वितर्क करते रहना चाहिये
शक्ति ही सम्पूर्ण ब्रह्माण्डकी रचना करती है, सबका पालन करती है और इच्छानुसार इस चराचर जगत्का संहार करती है ।
उसके बिना विष्णु, शिव, इन्द्र, ब्रह्मा, अग्नि, सूर्य और वरुण कोई भी अपने-अपने कार्यमें किसी प्रकार भी समर्थ नहीं हो सकते ।
वे देवगण शक्तियुक्त होनेपर ही अपने-अपने कार्योंको सम्पादित करते रहते हैं। प्रत्येक कार्य-कारणमें वही शक्ति प्रत्यक्ष दृष्टिगोचर होती है
मनीषी पुरुषोंने शक्तिको सगुणा और निर्गुणा भेदसे दो प्रकारका बताया है। सगुणा शक्तिकी उपासना आसक्तजनों और निर्गुणा शक्तिकी उपासना अनासक्तजनोंको करनी चाहिये
धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष - इन चारों पदार्थोंकी - स्वामिनी वे ही निर्विकार शक्ति हैं। विधिवत् पूजा करनेसे वे सब प्रकारके मनोरथ पूर्ण करती हैं ।
सदा मायासे घिरे हुए अज्ञानी लोग उस महाशक्तिको 2 जान नहीं पाते। यहाँतक कि कुछ विद्वान् पुरुष उन्हें जानते हुए भी दूसरोंको भ्रममें डालते हैं। कुछ मन्दबुद्धि पण्डित अपने उदरकी पूर्तिके लिये कलिसे प्रेरित होकर अनेक प्रकारके पाखण्ड करते हैं ।
हे महाभागो ! इस कलिमें बहुत प्रकारके - अवैदिक तथा भेदमूलक धर्म उत्पन्न होते हैं; दूसरे युगोंमें नहीं होते ।
स्वयं भगवान् विष्णु भी अनेक वर्षोंतक कठोर तप करते हैं और ब्रह्मा तथा शिवजी भी ऐसा ही करते - हैं। ये तीनों देवता निश्चित ही किसीका ध्यान करते हुए कठिन तपस्या करते रहते हैं ।
इसी प्रकार अपनी इच्छाओंकी पूर्तिके लिये ब्रह्मा, विष्णु, महेश- ये तीनों ही देवता अनेक प्रकारके यज्ञ सदा करते हैं। वे उन पराशक्ति, ब्रह्म नामवाली परमात्मिका देवीको नित्य एवं सनातन मानकर सर्वदा मनसे उन्हींका ध्यान करते हैं ।
हे मुनिश्रेष्ठ ! सब शास्त्रोंका यही निश्चय जानना चाहिये कि दृढनिश्चयी विद्वानोंके द्वारा वे आदिशक्ति ही सदा सेवनीय हैं ।
यह गुप्त रहस्य मैंने कृष्णद्वैपायनसे सुना है जिसे उन्होंने नारदजीसे, नारदजीने अपने पिता ब्रह्माजीसे और ब्रह्माजीने भी भगवान् विष्णुके मुखसे सुना था ।
इसलिये विद्वान् पुरुषोंको चाहिये कि वे न तो किसी अन्यकी बात सुनें और न मानें तथा दृढप्रतिज्ञ होकर सर्वदा शक्तिकी ही उपासना करें ।
शक्तिहीन असमर्थ पुरुषका व्यवहार तो प्रत्यक्ष ही देखा जाता है [कि वह कुछ कर नहीं पाता]। इसलिये सर्वव्यापिनी आदिशक्ति जगज्जननी भगवतीको ही जाननेका प्रयत्न करना चाहिये ।
That feeling, when someone special holds your hand, and a beautiful bond forms between us.
Sometimes, it is meant to be.
But sometime this is a necessity.
But sometimes, when you are completely broken, it is for the sake of inspiration.
This feels like a sign and a blessing shown by God.
क्या भागदौड़ भरी जिंदगी ने आपका चैन छीन लिया है?? 🤔🤔🤔🤔
घंटों मेहनत करने के बाद भी आप तनाव 🤯 और एंग्जाइटी🥵 में जी रहे हैं ???
इसका सीधा असर आपकी रात की नींद पर पड़ रहा है ???? 🥱🥱🥱🥱
आजकल लोगों का ज्यादातर समय अपने काम और परिवार की जिम्मेदारियों को पूरा करने में चला जाता है। ऐसे में उनके पास पर्याप्त नींद लेने के लिए समय ही नहीं बचता।
जिसका सीधा असर उनकी सेहत पर पड़ता है। लेकिन तनावभरी जिन्दगी में थोड़ा आराम करना भी जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक व्यक्ति को हर दिन ज्यादा नहीं, तो कम से कम 7-9 घंटे नींद लेने की जरूरत होती है।
नेशनल स्लीप फाउंडेशन की मानें तो अगर आप हेल्दी जीवन जीना चाहते हैं तो कम से कम 7 घंटे की रात की नींद बहुत जरूरी है।
कम सोने से ओबेसिटी यानी वजन बढ़ने की समस्या हो सकती है। पूरी नींद लेने पर आपकी याददाश्त शक्ति मजबूत रहती है और आप भूलते नहीं। ऐसा करने से एथलेटिक और फिजिकल परफॉर्मेंस बढ़ा रहता है। रात में सात घंटे सोने से हार्ट से संबंधित बीमारियों को खतरा कम रहता है। नींद पूरी ना लें तो इससे डायबिटीज टाइप टू का खतरा पैदा हो सकता है। ना सोने से डिप्रेशन, एंग्जायटी जैसी मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्या हो सकती है
और सर दर्द
अगर सर दर्द ने आपको परेशान कर रखा है तो बुजुर्गो का अजमाया हुआ नुस्का है दूध मे जलेबिया भीगोकर सूर्योदय से पूर्व 21 -41 तक खाना और फिर भूल जाना ये सर दर्द कोशिश करे की पेन किलर का प्रयोग कम करे क्योकि इसके दुष्परिणाम होते है । जैसे हेयरफाल,ग्रेयिंग । 😱
बाकी दिमाग का उपयोग और गुस्सा कम करे। 🙏
उदास लम्हों की न कोई याद रखना ।
तूफान मे भी वजूद अपना संभाल कर रखना ।।
किसी की जिंदगी की खुशी हो आप ।
यही सोचकर आप अपना ख्याल रखना ।।
लव स्टोरी ऐसी होनी चाहिए..........✍🏻
जिसकी शुरुआत हो, लेकिन अंत कभी ना हो।
जिसमें मिलन हो, परंतु जुदाई ना हो।
जिसमें केवल खुशी हो, कहीं गम ना हो।
जिसमें समर्पण हो, स्वार्थ ना हो।
जिसमें वासना ना हो, इज्जत हो।
जिसमें प्रेम हो, कामना ना हो।
जिसका एहसास दिल को सुकून देने वाला हो, हृदय को भेदने वाला ना हो।
जिसका अनुभव सुखद हो, दुखद परिणाम ना हो।
जिसको सुनाते हुए गर्व का एहसास हो, शर्मिंदगी का नहीं।
जिसमें विश्वास हो,शक के लिए कहीं जगह ना हो।
लव स्टोरी ऐसी होनी चाहिए, जिसमें खुशी के आंसू हो गम के नहीं।
जिसमे सिर्फ इंतजार ही न हो, बल्कि एक सुखद अंजाम भी हो ।
जिसमे सबका साथ हो, आशीर्वाद हो, कोई नाराज न हो ।
जिसमे मुसीबतो से डर कर भागने वाले नही, बल्कि दोनो सामना करने को तैयार हो ।
जो जीवन में कभी याद आये तो दिल मे दुख और आंखों में नफरत ना हो बल्कि होंठों पर मुस्कान हो। काश !!!!!! की मै कह सकू कि सौभाग्य से हम भी ऐसी ही एक प्रेम कहानी के पात्र हैं। ........
एक रिश्ते को बनाये रखने के लिए प्रयास करो 🙏
प्रयास नही कर सकते, तो लिखो 🙏
लिख नही सकते, तो बोलो 🙏
बोल नही सकते तो, साथ दो 🙏
साथ नही दे सकते तो,
जो प्रयास कर रहे है उनका मनोबल न गिराए 🙏
क्योकि वो आपके हिस्से की लड़ाई लड़ रहे है । 🙏
गंगा में नहाने से पाप धुल जाते हैं ऐसा हमें बचपन से सिखाया गया और धर्मशास्त्र में भी लिखा गया है। गंगा पाप नाशिनी है और इसमें स्नान करने से सारे पाप धुल जाते है। जब माता पार्वती ने शिवजी से पूछा कि जब लोग गंगा में स्नान करते हैं तो उनके सारे पाप धुल जाते हैं। जो नित्य गंगा स्नान करता है तो उसे कोई कष्ट नहीं होना चाहिए। इसका जवाब शिवजी ने बड़े आसानी से दिया और कहा कि किस प्रकार गंगा में स्नान करने से सारे पाप नष्ट होते हैं आइए जानते हैं शिव और पार्वती का गंगा जी के बारे में संवाद में।
एक समय शिव जी महाराज पार्वती के साथ हरिद्वार में घूम रहे थे। पार्वती जी ने देखा कि सहस्त्रों मनुष्य गंगा में नहा नहाकर 'हर-हर' कहते चले जा रहे हैं परंतु प्रायः सभी दुखी और पाप परायण हैं। पार्वती जी ने बड़े आश्चर्य से शिव जी से पूछा कि 'हे देव! गंगा में इतनी बार स्नान करने पर भी इनके पाप और दुखों का नाश क्यों नहीं हुआ? क्या गंगा में सामर्थ्य नहीं रही?'
शिवजी ने कहा 'प्रिये! गंगा में तो वही सामर्थ्य है, परंतु इन लोगों ने पापनाशिनी गंगा में स्नान ही नहीं किया है तब इन्हें लाभ कैसे हो?"
पार्वती जी ने आश्चर्य से कहा कि "स्नान कैसे नहीं किया? सभी तो नहा-नहा कर आ रहे हैं? अभी तक इनके शरीर भी नहीं सूखे हैं।'
शिवजी ने कहा, 'ये केवल जल में डुबकी लगाकर आ रहे हैं। तुम्हें कल इसका रहस्य समझाऊंगा।'
दूसरे दिन बड़े जोर की बरसात होने लगी। गलियां कीचड़ से भर गईं। एक चौड़े रास्ते में एक गहरा गड्डा था, चारों ओर लपटीला कीचड़ भर रहा था।
शिवजी ने लीला से ही वृद्ध रूप धारण कर लिया और दीन-विवश की तरह गड्ढे में जाकर ऐसे पड़ गए, जैसे कोई मनुष्य चलता-चलता गड्ढे में गिर पड़ा हो और निकलने की चेष्टा करने पर भी न निकल पा रहा हो।
पार्वती जी को उन्होंने यह समझाकर गड्ढे के पास बैठा दिया कि 'देखो, तुम लोगों को सुना-सुनाकर यूं पुकारती रहो कि मेरे वृद्ध पति अकस्मात गड्ढे में गिर पड़े हैं कोई पुण्यात्मा इन्हें निकालकर इनके प्राण बचाए और मुझ असहाय की सहायता करे।
शिवजी ने यह और समझा दिया कि जब कोई गड्ढे में से मुझे निकालने को तैयार हो तब इतना और कह देना कि 'भाई, मेरे पति सर्वथा निष्पाप हैं इन्हें वही छुए जो स्वयं निष्पाप हो यदि आप निष्पाप हैं तो इनके हाथ लगाइए नहीं तो हाथ लगाते ही आप भस्म हो जाएंगे।'
पार्वती जी 'तथास्तु' कह कर गड्ढे के किनारे बैठ गईं और आने-जाने वालों को सुना-सुनाकर शिवजी की सिखाई हुई बात कहने लगीं। गंगा में नहाकर लोगों के दल के दल आ रहे हैं। सुंदर युवती को यूं बैठी देख कर कइयों के मन में पाप आया, कई लोक लज्जा से डरे तो कइयों को कुछ धर्म का भय हुआ, कई कानून से डरे।
कुछ लोगों ने तो पार्वती जी को यह भी सुना दिया कि मरने दे बुड्ढे को क्यों उसके लिए रोती है? आगे और कुछ दयालु सच्चरित्र पुरुष थे, उन्होंने करुणावश हो युवती के पति को निकालना चाहा परंतु पार्वती के वचन सुनकर वे भी रुक गए।
उन्होंने सोचा कि हम गंगा में नहाकर आए हैं तो क्या हुआ, पापी तो हैं ही, कहीं होम करते हाथ न जल जाएं।
बूढ़े को निकालने जाकर इस स्त्री के कथनानुसार हम स्वयं भस्म न हो जाएं। किसी का साहस नहीं हुआ। सैंकड़ों आए, सैंकड़ों ने पूछा और चले गए। संध्या हो चली। शिवजी ने कहा, 'पार्वती! देखा, आया कोई गंगा में नहाने वाला?'
थोड़ी देर बाद एक जवान हाथ में लोटा लिए हर-हर करता हुआ निकला, पार्वती ने उसे भी वही बात कही। युवक का हृदय करूणा से भर आया। उसने शिवजी को निकालने की तैयारी की। पार्वती ने रोक कर कहा कि 'भाई यदि तुम सर्वथा निष्पाप नहीं होओगे तो मेरे पति को छूते ही जल जाओगे।'
उसने उसी समय बिना किसी संकोच के दृढ़ निश्चय के साथ पार्वती से कहा कि 'माता! मेरे निष्पाप होने में तुझे संदेह क्यों होता है? देखती नहीं मैं अभी गंगा नहाकर आया हूं। भला, गंगा में गोता लगाने के बाद भी कभी पाप रहते हैं? तेरे पति को निकालता हूं।'
युवक ने लपककर बूढ़े को ऊपर उठा लिया। शिव-पार्वती ने उसे अधिकारी समझकर अपना असली स्वरूप प्रकट कर उसे दर्शन देकर कृतार्थ किया। शिवजी ने पार्वती से कहा कि 'इतने लोगों में से इस एक ने ही गंगा स्नान किया है।'
इसी दृष्टांत के अनुसार जो लोग बिना श्रद्धा और विश्वास के केवल दंभके लिए गंगा स्नान करते हैं उन्हें वास्तविक फल नहीं मिलता परंतु इसका यह मतलब नहीं कि गंगा स्नान व्यर्थ जाता है। विश्वास के साथ किए गए गंगा स्नान का मिलता है वास्तविक फल। कहने का तात्पर्य है कि किसी भी चीज को प्राप्त करने के लिए आपको सच्चे मन से श्रद्धा भाव से एवं त्याग से कोई कार्य करने पर फल अवश्य अच्छा मिलता है। लेकिन लोभरहित एवं ईर्ष्या भाव कोई अच्छा कार्य करने पर भी उसका फल अच्छा नहीं होता है।
मै सच की राह पर हूं मैने कुछ गलत नही किया है फिर दूसरे कितने ही शक्तिशाली क्यो न हो सफलता मुझे ही मिलेगी । और इसकेलिए भीड़ की जरूरत नही मै अकेले ही काफी हूं ।
जैसे राम जी ने रावण का संहार किया, वैसे ही आपके जीवन से सभी चिंताओं, दुखों और नकारात्मकता का नाश हो। विजयादशमी की अनंत शुभकामनाएं! टू माई ...